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6बेटियों संग विधवा लता का परिवार झेल रहा है कुपोषण, गरीबी की‌ मार

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6बेटियों संग विधवा लता का परिवार
झेल रहा है कुपोषण, गरीबी की‌ मार
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विनोद चड्ढा बिलासपुर

घुमारवीं से मात्र‌ 3 किलोमीटर की दूरी पर गांव बड्डू डा० दाभला में विधवा बहिन लता देबी अपनी 6 बेटियों संग बहुत ही गरीबी में गुजारा कर रही है। पति प्यारे लाल ट्रक ड्राइवर था व वर्ष 2016 में सूगर व उच्च रक्तताप के चलते इस दुनिया से चल बसा। अपने पीछे भूख से जूझने को छोड़ गया अपनी पत्नि लता देबी व 6 मासूम बच्चियों को।
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परिवार की हालत देख कर हमारी आंख में आये आंसू
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मैं अौर मेरा दोस्त राकेश मनकोटिया सुबह सुबह 5.45 पर ही बहन लता देबी के घर पहुंचे तो बाहर बरामदे में ही पत्थरों के सहारे बनाई रसोई में काम करती मिली। कुपोषण की शिकार लता की हालत बहुत ही नाजुक थी। हमने बात शुरु की तो रुआंसी होकर बताने लगी कि पहले तो जैसे तैसे गुजारा चल रहा था परंतु पति के जाने के बाद मानो पहाड़ ही टूट गया है। परिवार को I.R.D.P. में डाला है। पुराना कच्चा मकान वह भी पुस्तैनी। उसके हिस्से में एक कमरा नीचे व एक ऊपर। मैने बोला बेटियों से मिलना है। एक ही कमरे में जिसमें मुश्किल से एक डबल बैड व बच्चियों के स्कूल बैग व किताबें कापियां भरी पड़ी थी में से सभी 6 बहिनें बाहर निकली। कुपोषण की बजह से सभी अपनी आयु से छोटी लग रही थीं।
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मात्र ₹2450 महीने की आय से कैसे होगा गुजारा
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लता देबी को पंचायत वालों ने पानी छोड़ने के काम पर रखा है जिसे ₹1700 पगार मिलती है व 750 विधवा पैंशन। इतने ही पैसों से महीने का बच्चियों का पढ़ाई का खर्च व परिवार को भोजन कैसे आयेगा। यह सोच कर रोना आ गया। मकान के ऊपर तरपाल पड़ा है। हालत बहुत खराब है। इसके सामने एक कमरा व बरामदा पक्का बनाया था। पर अधूरा है। न कोई खिड़की न दरवाजे न प्लास्तर। बरामदे में 2 पत्थर रख कर रसोई बनाई जा रही है।
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पढ़ने में होशियार हैं सभी बहिनें
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सबसे बड़ी +2 के बाद कम्प्यूटर कोर्स कर रही है तो सबसे छोटी सिमरन तीसरी में पढ़ती है। लिखाई इतनी सुंदर, सभी के अंक बहुत अच्छे आये हैं। बातचीत में सभी चंचल व समझदार। एक जो नौवीं में है उसकी लिखाई में तो मोती परो दिये हैं।
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नेहा मानव सेवा सोसाइटी बनेगी मददगार
2 बेटियों को गोद लेकर प्रति महीना देगी ₹ 3000
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जब मैने बोला कि आज से आप मेरी बहिनें हैं। मेरे हाथ में अपना हाथ दो तो सभी 6 बहुत खुश हुई व तस्वीर में आप देख सकते हो कैसे मेरे हाथ में हाथ रख कर खुश हैं। परम पिता परमात्मा की कृपा से व आप सभी मासिक सहयोगी सदस्यों के सहयोग से नेहा मानव सेवा सोसाइटी ने पहले से ऐसे 62 जरुरतमंद बच्चे
“नेहा बाल संरक्षण योजना ”
में आज तक जोड़े हैं जिन्हे ₹1500 प्रति महीना भेजा जाता है। आज से इस परिवार की 2 बेटियों को इस योजना में जोड़कर ₹3000 प्रति महीना इस परिवार को इनके बैंक खाता में भेजा जायेगा।
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आप भी सहयोग के लिये आगे आयें
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मेरी आप से करबद्ध अपील है कि समाज में ऐसे जरुरतमंदों की मदद के लिये आगे आयें। आप ₹200, 300, 500 या एक बच्चे के लिये 1500 इनमें से कोई एक राशि चुन कर प्रति महीना सहयोग करके नेहा मानव सेवा सोसाइटी के आजीवन मासिक सहयोगी सदस्य बन सकते हैं। वर्तमान में 500 मासिक सहयोगी सदस्य हैं। अगर आप भी इस यज्ञ में सहयोगी बनना चाहते हैं तो मेरे नं पर संपर्क करें। मेरी पोस्ट पर अपना watsaap नं लिखें। आप को सारी जानकारी भेज दी जायेगी। मेरी भूमिका तो एक पोस्टमैन की है जो आपके भेजे सहयोग को जरुरतमंद तक पहुंचा देता हूं।
आपका अपना
पवन बरुर 8219337757
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मेरे दोस्त सुरेश भारद्वाज की भेजी हुई पंक्तियाँ बहुत सटीक लग रही हैं
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ज़िन्दगी से कहो कुछ और सितम करे हम पर
होसला टूटा नहीं है , अभी हारे नहीं हैं हम l
अपनी ही धुन में गाते हैं दर्द की इंतेहाँ में भी ,
तासीर और तेज हो ज़ख्मो से डरते नहीं हैं हम l
गम किसे कहते हैं ,चोट ज़िगर पे सहते हैं ,
सांस थम जाये तो भी मरते नहीं हैं हम l
निगाहों की तपिश से , तोड़े हैं राह के पत्थर ,
आग से निकले हैं , कभी थमते नहीं हैं हम l
ज़िन्दगी से कहो अभी और जुल्म करे हम पर
संवर रहे हैं नज़ाकत से ,बिखरे नहीं हैं हम l

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