डूबने की घटनाओं को रोकने के लिए माॅक ड्रिल अभ्यास किया

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हरिद्वार। कांवड़ मेला को दुर्घटना रहित मेला बनाने के उद्देश्य से कांवड़ यात्रा से एक दिन पूर्व 16 जुलाई को भीड़ प्रबंधन व श्रद्धालुओं की डूबने की घटनाओं को रोकने के लिए माॅक ड्रिल  अभ्यास किया गया। बैठक में आपदा प्रबंधन के वरिष्ठ अधिकारी बीबी गणनायक की उपस्थिति में इंसीडेंट कमांडेंट सीडीओ श्री विनीत तोमर ने आपदा कंट्रोल सभागार रोशनाबाद से साइट चीफ को बचाव कार्यो हेतु निर्देशित किया। कंट्रोल रूम में सूचना विभाग, स्वास्थ्य विभाग, यातायात विभाग के अधिकारियों के साथ चिन्हित साइटों के लीडर को वीडियो काॅफेंसिंग के माध्यम से सूचनाओं का आदान प्रदान तथा घटना स्थलों की माॅनिटरिंग की। संसाधन उपलब्ध कराने वाले विभाग एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस, फायर, ट्रेफिक तहसील आदि स्टेजिंग एरिया ऋषिकुल मैदान से घटना स्थलों के लिए रवाना हुए। घटनायें चार स्थानों पर हुईं जिनमें सीसीआर के पीछे हाथीपुल, सर्वानंद घाट, प्रेमनगर घाट, चमगादड़ टापू। हाथीपुल के पास दो लोगों के जल भरते डूब जाने तथा भगदड़ में तीन लोगों को सिर की चोट लगने की सूचना पर कंट्रोल रूम से स्टेजिंग मैनेजर श्रीमती कुसुम चैहान को एसडीआरफ, जल पुलिस की टीम भेजने के निर्देश दिये। साथ ही राहत कार्याे के दौरान रेस्क्यू किये गये लोगो को एम्बुलेंस से नजदीकी चिकित्सालय भेजा गया। सभी टीम निर्देश मिलते ही रवाना हुई। 
सर्वानंद घाट पर कांवडियों में आपस में झगड़ा तथा दो लोगों के बह जाने की घटना पर आईसी ने एक एसडीआरएफ टीम, स्थानीय पुलिस के साथ स्वंय एसडीएम को मौके पर पहुंचने की निर्देश दिये।
प्रेमनगर आश्रम घाट पर गाड़ियों के टकराने से एक्सीडंेट की घटना पर भीड़ द्वारा गाड़ी को आग लगा दिये जाने की सूचना कंट्रेाल रूम को मिलते ही आईसी ने मेडिकल युनिट, फायर युनिट को तत्काल पहुंचने के निर्देश दिये। साइट चीफ को लगातार कंट्रोल रूम से सम्पर्क  बनाये रखने को कहा।
चमगादड़ टापू पर स्थानीय लोगों की लापरवाही से आग लग जाने तथा लोगों की झुलस जाने की सूचना पर फायर टेंडर, एक टीम एसडीआरएफ लोकल पुलिस तथा एम्बुलेंस को भेजा। इंसीडेंट कमांडेंट ने क्षेत्र की पटवारियों को निर्देश दिये कि घायल व पीड़ितों की जानकारी, नाम पता, परिजनों की सूचना एकत्र कर सूचित करें।
अभ्यास के दौरान विभागों का आपसी समन्वय तथा आपदा के समय तत्कालिक जरूरतें समझी गयी। कंट्रोल रूम को मिली दुर्घटना की सूचना पर आॅपरेशन टीमों द्वारा की गयी कार्रवाई का समय, रेस्क्यू कर लिये जाने की अवधि आदि संकलित की गयी।
ड्रिल के बाद रिस्पाॅसिबल आॅफिसर (जिलाधिकारी श्री दीपेंद्र चौधरी ) ने सभी विभागों की टीम के कार्यो की समीक्षा की। उन्होंने इस अभ्यास में छोटे से लेकर बड़े अधिकारी की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी अधिकारी कर्मचारी को कहीं कोई समस्या किसी गतिविधि को करते हुई तो वह उसे साझा करें, ताकि वास्तविक आपदा की स्थिति के समय बाधा से बचा जा सके और समय को  राहत कार्य में लगाया जाये।

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