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कुठेड़ा पंचायत के स्वतन्त्रत्ता सैनानी डंडू राम ने प्रदेश सरकार पर लगाया अनदेखी और अपमान का आरोप



विनोद चड्ढा कुठेड़ा बिलासपुर

बिलासपुर के कुठेड़ा पंचायत के 93 वर्षीय स्वतंत्रत्ता सैनानी डंडू राम
ने 4 दिन से छोड़ा खाना-पीना

एक तरफ सरकार स्वतंत्रता सैनानी के गुण गान करने से थकती नही और उससे उन्ही स्वतंत्रता सैनानी का मजाक उड़ाया जा रहा है जिनके दम पर आज चाहये सरकार हो या आम आदमी चने की साँस ले रहे हो लेकिन सरकार की तरफ से उन को सिर्फ हर क्षेत्र में अनदेखी हो रही है।ऐसा ही एक घटना हाल में सदर बिलासपुर की कुठेड़ा पंचायत से सबंध रखने बाले डंडू राम से हुआ

उन्होंने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया है कि उन्हें सम्मानित करने की कोई आवश्यकता नहीं है, मगर जो भद्दा मजाक कर उन्हें इस आयु के पड़ाव पर अपमानित किया है, इस प्रकरण की जांच की जाए.

अपमान से आहत स्वतन्त्रत्ता सैनानी ने बीते चार दिन से खाना-पीना छोड़ दिया. 93 साल के स्वतन्त्रत्ता सैनानी ने सरकार पर अनदेखी का आरोप लगाया है. मामला हिमाचल के बिलासपुर जिले का है. बिलासपुर के गांव कुठेड़ा निवासी स्वतन्त्रत्ता सैनानी डंडू राम ने अपने अपमान से आहत होकर खाना-पीना और घर जाना भी छोड़ दिया है.

93 वर्षीय डंडू राम ने सरकार पर आरोप लगाया है कि 9 अगस्त को राष्ट्रपति की ओर से सम्मानित करने के लिए उन्हें जिला प्रशासन से निमंत्रण पत्र प्राप्त हुआ मिला, मगर दिल्ली पहुँचने पर राजभवन के अधिकारियों ने यह कह कर निराश किया कि शिमला से उन्हें सम्मानित करने का स्वीकृति पत्र जारी नहीं हुआ है. इस कारण आप सम्मान समारोह में भी शामिल नहीं ले सकते हैं.

पिता बहुत आहत हैं-बेटी

स्वतंत्रता सैनानी की बेटी मीरा देवी ने इस संदर्भ में जानकारी देते हुए बताया कि इस घटना से उनके पिता बहुत आहत हुए. उन्होंने वहां से घर आने के लिए मना कर दिया. वह बार-बार एक ही बात कर रहे थे, जिंदगी भर उन्होंने अपना जीवन बड़े गर्व और आत्मसम्मान के साथ किया है, मगर जीवन के 93 बसंत देखने के बाद ऐसी घटना घटित होने से वह अपने आप को ठगा सा महसूस कर रहे हैं.

सरकार की ओर से भेजा गया पत्र.

12 साल जेल में रहे, आज यह सिला मिला

मीडिया कर्मियों से बातचीत करने हुए स्वतंत्रता सैनानी डंडू राम ने बताया कि आजादी की लड़ाई के दौरान बाल्यकाल में ही उन्हें तत्कालीन कहलूर राजा आनंद चंद ने उन्हें बारह वर्ष का देश निकाला दिया था. उस दौरान 6 माह कारावास की सजा भी झेली थी. बारह वर्ष तक वह घर नहीं आ सके थे. देश आजाद होने के बाद वर्ष 1948 में वह भारतीय सेना की डोगरा रेजिमेंट में भर्ती हो गए. वर्ष 1962 में चीन, वर्ष 1965 और 1971 में भारत-पाक में हुए युद्धों में भी हिस्सा लिया. उत्कृष्ट सेवाओं के प्रति भारतीय सेना व भारत सरकार से भी उन्हें कई मैडल सम्मानपूर्वक प्रदान किए थे.

मोदी से अपील

उन्होंने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया है कि उन्हें सम्मानित करने की कोई आवश्यकता नहीं है, मगर जो भद्दा मजाक कर उन्हें इस आयु के पड़ाव पर अपमानित किया है, इस प्रकरण की जांच की जाए, क्योंकि यह प्रकरण एक स्वतन्त्रत्ता सैनानी के मान -सम्मान एवं स्वाभिमान से जुड़ा हुआ है.

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